About:

शेखर ने अपने बैग से तेल की शीशी, जेली का ट्यूब, छोटा तौलिया और “बलराम” को निकाला और पास की मेज़ पर रख दिया। प्रगति का मुँह तकिये में छुपा था और शायद उसकी आँखें बंद थीं। वह जानती थी कि क्या होने वाला है और वह शेखर की खातिर कोई भी दर्द सहने के लिए तैयार थी। शेखर ने नारियल के तेल से प्रगति के चूतड़ों की मालिश शुरू की।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*