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प्रगति ने अपनी गांड ऊपर की तरफ दबा कर उसके लंड को जितनी देर अन्दर रख सकती थी रखा। थोड़ी देर में शेखर का लंड स्वतः बाहर निकल गया और प्रगति की पीठ पर निढाल पड़ गया। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थी और दोनों पूर्ण तृप्त थे। शेखर ने प्रगति को उठा कर अपने सीने से लगा लिया। उसके पूरे चेहरे पर चुम्बन की वर्षा कर दी और कृतज्ञ आँखों से उसे निहारने लगा।

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