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मेरा लंड भी अब पूरे उफान पर था और फाड़ देना चाहता था माँ की चूत को। जिस बात का मुझे इतनी दिनों से इंतज़ार था वो सपना पूरा होने वाला था। माँ के दोनों संतरे मानो ऐसे लग रहे थे जैसे तो बड़े-बड़े खरबूजे ! मैंने कहा- माँ, इनको तो मैं खा जाऊंगा। माँ तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थी। और मैंने अपना लंड माँ की चूत में बाड़ दिया और फिर चालू हुआ माँ-बेटे की चुदाई का कार्यक्रम ! वो बीच बीच में इतनी तेज चिल्ला रही थी, कह रही थी- बेटा चोद दे आज अपनी माँ को ! घुस जा पूरा इसके अन्दर ! फाड़ डाल इसको।

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