“ठीक हूँ मामा जी। ”
“मामा की याद आती है राधा रानी?”
“आती तो है ! क्यूँ ???”
“मुझे तो बहुत याद आती है तुम्हारी…. मेरी जान !”
“मामा, अपनी भांजी को ‘जान’ कह रहे हो ! इरादे तो नेक हैं ना तुम्हारे ?”
मामा थोड़ा झेंप गया। “अरी नहीं…. बस उस रात को याद कर कर के दिल में दर्द सा होने लगता है राधा रानी !”
“मामा तुम भी ना !”
“क्या तुम भी ना?”
“मैं नहीं बोलती आप से।