मामा का लण्ड अब मुझे अपने कूल्हों पर महसूस होने लगा था। तभी मम्मी आ गई और मामा मुझ से दूर होकर सोफे पर बैठ गए। अभी दोपहर के तीन बजे थे, मौसम बहुत सुहाना हो रहा था, मामा बोले “राधा बेटा ! तुम तो कह रही थी कि जब मैं शहर आऊंगा तो तुम मुझे शहर घुमाओगी, अब क्या हुआ ??”
मैं मामा के शहर घूमने का मतलब अच्छे से समझ रही थी।