ये गांव के लोग भी ना बहुत भोले होते है पर इनका लण्ड सच में कमाल होता है। “यहाँ पर नहीं, घर पर चलते हैं ना !”
“पर घर पर तो सभी होंगे ?”
“आप चिंता ना करें, रात को जब सब सो जायेंगे तो मैं आपके कमरे में आ जाउंगी !”
“सच?”
“हुं ”
“चलो ठीक है !” कहते हुए मामा ने मुझे एक बार फिर चूम लिया । तय कार्यक्रम के मुताबिक़ मैं रात को 11 बजे उनके कमरे में पहुँच गई।