वो चली गई। मैं वहीं खड़ा होकर उसे देख रहा था, मेरा मन कर रहा था कि उसी के साथ बैठा रहूँ। वो घर पहुँच गई और मुड़कर हाथ हिला कर बाय किया, मैंने भी हाथ हिला दिया। मैं लगभग 30 मिनट वहाँ बैठा उसके बारे में सोचता रहा। अचानक वो मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। मैं कुछ बोलता, इससे पहले बोली- जानू, घर जाने की सलाह नहीं है?
मैंने कहा- नहीं !
क्यूँ?
पता नहीं ! मन नहीं कर रहा।