एक एक पल मुझ पर भारी पड़ रहा था। चाँदनी रात थी पर थोड़ी धुन्ध होने के कारण उसका घर दिखाई नहीं दे रहा था। बीच में मैं उसके घर तक घूम आया था। सब लोग शायद सो चुके थे। लगभग 11 बजे लक्ष्मी आ गई। उसे देखकर मैंने चैन की साँस ली। उसने काले रंग का कमीज़-सलवार और ऊपर शॉल ओढ़ रखी थी। मैं उसे देखकर मुस्कराया, वो भी मुस्कराई और लव यू जान ! कहकर मेरे आगे पीठ करके बैठ गई।
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