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उसने सिसकी ली और बोली- राज, मेरा छेद तो उंगली के बराबर है और तुम्हारा तो बहुत मोटा है, यह कैसे अन्दर जायेगा?

मैं- तुम्हें पता भी नहीं चलेगा। मैंने उसकी टांग ऊपर की और लण्ड पकड़ कर चूत पर रखा। मेरे सुपारे से उसकी चूत की फाकें अलग अलग हो गई। मैंने थोड़ा जोर लगाया। लेकिन चूत ज्यादा तंग थी। मैं खड़ा हुआ, लक्ष्मी चुप लेटी थी क्योंकि उसे डर लग रहा था।

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