तो?
“सुहागरात भी तुम्हारे साथ मना ली”
मुझे हँसी आ गई। वो बोली- तुम्हें हँसी आ रही है?
मैं बोला- जान, जब हम कुछ नहीं कर सकते तो हमें समय के साथ समझौता कर लेना चाहिए। हाँ ! उसने कहा और बोली- जानू, मैं तुम्हारी थी, हूँ और रहूँगी। तुम जब चाहो बुला लेना। हम उसके घर पहुँच गये और एक दूसरे को चूमा और वह बाय कहकर चली गई।