About:

फिर जब शाम होने को आई तो मई घर की तरफ़ चला और अंधेरा होते होते मई घर लौट आया और मई जैसे ही घर मई क़दम रखा मुघे गाश आ ग्या मैने देखा ससू जो विधवा थी वो साजधाज़ के खड़ी थी और मुघे देख के मुस्करा रही थी मैने देखा लाल सदी हटो मे चूड़ी होटो पे लीपिस्तिक हा माँग मई सिंदूर नही था मई झट से फटक बंद करके उनके पास आया तो वो मेरा पाओं चुने लगी मई समझा वो मेरा लांद चूसने जा रही है फिर मई उन्हे उपर उठाया और उन्हे बिस्टेर पे घूँघट करके बिताया फिर मई दीदी के कमरे मई ग्या और वहा जाके सिंदूर खोजने लगा सिनडोर लेकर वापस आया देखा तो ससू डार्लिंग वैसे बैठी हुए थी मई उनके पास ग्या एक हट मई छुटकी सिनडोर लेकर दूसरे हट से उनके गीुँघट को खोल दिया और उनकी माँग मई सिंदूर दल दिया वो मेरे ग्ले लग गयी फिर मई उनके लाल लाल होटो को चूमने लगा और एक हट से उनके पेटी कोट मई हट डालकर उनकी बूर को सहलने लगा वो मेरे पैंट को खोल के मेरी कची नीचे सरका के मेरे लांद को पकड़ ली और उसे सहलने लगी आज उनकी बूर चिक्नी.

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