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अपने कमरे में घुसते हुए वोह अपनी हवलदार कोकिला शेखावत से मुख़ातिब होती है ” उन तीन हराम की ज़नियों को सब कुछ ठीक से समझा दिया है ना ? मंत्री जी के सामने कोई हील हुज्जत ना हो . ” “जी मदाम सा कोई तकलीफ़ नही होगी रात में अच्छी तरह क्लास ली है उनकी “. निकाल सामान मंत्री जी के आने से पेहले चुस्त हो लिया जाए .

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