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कोकिला ने नीचे होते जेलर तेजेश्वरी के होटों पे अपने तपते होंट रख दिए. जेलर और हवलदार का फ़र्क ख़तम हो चुका था मानो! ससपी तेजेस्वरी राणा ने अपनी जीभ निकल के कोकिला के मुह में डाल दी जिसे हवलदार कोकिला जोश से चूसने लगी . उन्माद में दोनो की आँखें बंद थी और नाक से गरम साँसे निकल रही थी. तेजेश्वरी राणा का अपनी बूर के भगनाशे (clit) को रग़ड़रना बदस्तूर जारी था.

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