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हालांकि हम लोग घर पर कई बार एक दूसरे से मिल चुके थे लेकिन बात-चीत उस दिन ही हुई थी। मैंने धीरे-धीरे उसे घुलना-मिलना शुरू किया, जैसे वो कौन सी कक्षा में पढ़ती है, उसकी कौन सहेली है उसे क्या पसन्द है वगैरह-वगैरह। शुरू में तो वो काफी शरमाई लेकिन फिर धीर-धीरे वो सामान्य हो गई और मुझसे हंसी मजाक भी करने लगी।

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