मैं पैदल नीतू को साथ लेकर आ रहा हूँ। रास्ते में एक जगह गढढे में पानी भरा हुआ था, मैं तो एक छलांग मार कर पार निकल गया लेकिन नीतू उस पार ही रह गई और कहने लगी- सर, मैं कैसी आँऊगी?
मैंने कहा- जैसे मैं आया हूँ वैसे ही तू भी कूद कर आ जा। नहीं सर, मैं पानी में गिर जाँऊगी। मैंने कहा- मैं इस तरफ खड़ा हूँ कूद कर आ जा।