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लेकिन तब तक हम घने खेतों से निकल कर गाँव के सामने आ चुके थे। इसलिये उसने कहा- यहाँ पर तो लोग हमें देख लेंगे। मैंने कहा- घबराओ मत, मैं तुम्हारी चुम्मी यहाँ पर नहीं लूँगा। मैं भी किसी एकान्त जगह की तलाश में था, चुम्बन का तो बहाना था मुझे भी तो उसकी चूत ही मारनी थी। इसलिये मैंने उससे कहा- तुम ही बताओ कहा दोगी?

उसने कहा- कल दोपहर में जब सब अपने घर खाना खाने के लिये जायेगे उस वक्त।

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