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क्योंकि अभी एक दो औरतें बैठी थी इसलिए मैंने ज्यादा बात करना ठीक नहीं समझा और उनके जाने का इन्तजार करने लगा। थोड़ी देर बाद बाकी औरते भी जाने के लिये कहने लगी तो मैंने उन्हें भी जाने के लिये कह दिया। जब देखा आस-पास अब कोई नहीं है तो मैंने उसे कमरे में अन्दर चलने के लिये कहा। हम लोग पंचायत घर के बरामदे में बैठते थे और धूप हो जाने पर अन्दर कमरे में चले जाते थे।

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