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दोपहर के तीन बजे होने के कारण किसी के वहाँ आने की कोई सभांवना नहीं थी। इसलिये मैंने दरवाजा बन्द नहीं किया वरना लोगों को शक हो सकता था। मैंने उसे वहीं चटाई पर लिटा दिया और उसकी चूत के दर्शन करने लगां। उसकी चूत एक दम चिकनी थी जिस पर छोटे-छोटे से रोंये ही निकले थे। जिन पर हाथ फिराने में बहुत ही मजा आ रहा था।

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