और वो मेरे पास ही चटाई पर आकर बैठ गई। उन्होने मुझसे पूछा- नीतू को क्या हुआ?
मैं एकदम उनकी तरफ देखने लगा लेकिन वो धीर-धीरे शैतानी हंसी हंस रही थी। मैंने कहा- कुछ नहीं ! क्यों?
नहीं वो लंगड़ाकर चल रही थी और बहुत थकी हुई सी लग रही थी। मैंने कहा- हाँ वो गडढे में फिसल गई थी शायद तभी उसके चोट में लग गई होगी।