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वैसे तो मैं गांव में इस तरह की हरकत से परहेज करता हूँ इसलिये मैंने दरवाजे पर ही खड़े होकर कहा- क्या बात है? जो भी कहना है, यहीं कह दो। अन्धेरा हो रहा है और अब मेरा रूकना सही नहीं है। तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर कहा- कम से कम एक मिनट के लिए अन्दर तो चलो। वो मुझे गैलरी से होती हुई अन्दर वाले कमरे में ले गई।

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