About:

. . . . बात उन दिनों की है जब मैंने जवानी की दहलीज पर पहला कदम ही रखा था और मुझे खुद पता नहीं था कि मैं इतना किस्मत वाला हूँ कि मुझे चोदने का अवसर इतनी जल्दी मिल जायेगा. . . पर उसके साथ कुछ फलसफा भी !

बरसात के दिन थे, मैं ग्यारहवीं कक्षा में था, रतलाम से ३५ किलोमीटर दूर मेरा गाँव था और मेरे गाँव से 8 किलोमीटर दूर मेरा स्कूल, जहाँ पर ग्यारहवीं कक्षा में कुल जमा 11 साथियों में 3 लड़कियाँ और बाकी 8 हम मुसटण्डे।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*