. . . . . मैंने बीच में टोकते हुए पूछ लिया- मैडम, आपको कैसे मालूम कि लड़के इतने बेकार कापी-किताब रखते हैं?
तो एक पल तो वो गुमसुम सी गई लेकिन उनके चेहरे से लग रहा था कि वो कहीं किसी को याद कर रही हैं क्योंकि उनकी जवा्नी भी हिल्लोरें ले रही थी और यौवन भी नहीं टूटा था। धीरे-धीरे बात करते-करते जैसा हमेशा होता है, उन्होंने मुझे छूना चालू कर दिया।