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हालाँकि मैंने इससे पहले केवल ब्लू फिल्मो में ऐसा देखा था। फिर एकाएक उन्होंने मुझे अलग किया और खड़ी हो गई। मैंने कहा- क्या हुआ मैडम?

उन्होंने कहा- आदित्य, यह ठीक नहीं है, यह गुरु-शिष्य की परम्परा के खिलाफ है !

और रोने लगी। मैंने कहा- जैसी आपकी इच्छा मैडम !
पर फिर मैंने तर्क दिया कि जब इतना कुछ हो गया है, आपने मेरा सामान भी हाथ में ले लिया तो गुरु-शिष्य वाली बात तो कब से ख़त्म हो गई, और इसमें बुरा क्या है?

कुछ देर सोचने के बाद मैडम ने मुझे चूमना शुरू कर दिया.

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