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मैडम तो जैसे उछल पड़ी। बाहर बरसात की आवाज़ और इधर पूरे कमरे में बस सिसकारियाँ गूंजने लगी- ओह आ आदि . . . अऽऽऽ ये क्या कर रहे हो. . . . . ओह मुझे अजीब सा लग रहा है। मैं बड़े प्यार से मैडम की चूत को चूसता, चूमता चाटता रहा। वो अपने होठों पर जीभ फ़ेर रही थी और मचल रही थी कि अचानक चिल्लाई- आदी ऽऽ छोड़ मुझे.

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