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हम दोनों अर्धमूर्छित से पड़े रहे काफ़ी देर। थोड़ी देर बाद उनके मुख पर असीम तृप्ति का आभास हो रहा था। उनके लबों पर बहुत हल्की सी मुस्कान भी दिख रही थी। मैं धीरे से उठा और अपने आपको रुमाल निकाल कर साफ़ किया। मैंने मैडम की तरफ देखा तो वो अभी भी लेटी हुई थी और उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे. . . मैंने पूछा- क्या हुआ मैडम? आप रो किसलिए रहे हो.

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