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मेरी नजर उसकी चूचियों पर थी, जी कर रहा था कि उसकी चूचियों को पकड़ कर भींच दूँ। पर मैं मजबूर था। लक्ष्मी ने मेरी नजर पहचान ली और अपनी चूचियों को चुन्ऩी से ढक लिया और नजर झुकाकर खड़ी हो गई। मैं अब भी ना चाहते हुए उसकी चूचियाँ और गाण्ड देख रहा था। वो बोली- चलो, पैदल घर चलते हैं। मैं हिम्मत करके बोला- मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

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