अचानक मेरी किस्मत खुली, चाची को स्कूल की मीटिंग के सिलसिले में दूसरे शहर जाना था जो तीस किमी दूर था। मेरे चाचा किसी दूसरे शहर में थे तो उन्होंने मेरी मम्मी से कहा- क्या राजू को ले जाऊँ. . . ?
मम्मी ने इजाज़त दे दी। मीटिंग शाम को 5 बजे ख़त्म हुई और तेज बारिश भी होने लगी थी। आखिरी बस भी जा चुकी थी। फिर चाची जी ने एक सुझाव दिया कि चलो राजू, यहाँ मेरी एक दूर की मौसी हैं, उनके घर रुकते हैं।