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इस बार ज्यादा मज़ा आ रहा था . . . . . . अब वो खुद ऊपर नीचे हो रही थीं। ” मर गई रे. . . . . . तू मेरा असली बेटा क्यूँ नहीं हुआ ! वर्ना तुझसे तो रोज़ चुदवाती. . . . ”

मैंने कहा,”पारुल जान, मैं जा रहा हूँ !”

तभी उन्होंने कहा,” चल तुझे दिखाती हूँ कि छोटा छिद्र क्या होता है। ”

और उतर कर घोड़ी बन गई। बाप रे ! मैंने गौर से देखा, इतनी बड़ी गांड.

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