अब मेरा मुँह और जीभ उनकी चूत चाट रही थी और वो मेरा लंड अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गए और वैसे ही लेट गए। उनकी चूत से गंगा-जमुना बह रही थी और क्या खुशबू आ रही थी। थोड़ी देर में हम फिर तैयार थे। उन्होंने कहा- अब देर मत कर और मेरी जवानी की प्यास बुझा दे !
तो मैंने अपने लंड का टोपा उनकी दोनों टांगों के बीच के गुलाबी छेद पर रख दिया।