मॉम ने जाकर खोला तो दादाजी दरवाजे पर खड़े थे, वो कहने लगे- क्या कर रहे थे माँ बेटे अन्दर?
तो माँ ने बताया- मेरी कमर में दर्द था तो विशाल मुझे बाम लगा रहा था !
दादाजी ने कहा- मुझे चूतिया मत बनाओ, मैं सब देख रहा था बाहर से कि तुम दोनों क्या कर रहे थे अन्दर !
मैं और मॉम डर कर दादाजी को कहने लगे- दादाजी, इस बात को पापा से मत कहना !
दादाजी कहने लगे- तुम कर सकते हो ? मैं कह नहीं सकता ? एक शर्त पर नहीं कहूँगा !
हमने तुरंत कहा- क्या ?
दादाजी ने कहा- जो तुमने किया वो मैं भी करूँगा !
यह सुनकर तो मैं और मॉम दंग रह गए, लेकिन हमारे पास और दूसरा रास्ता नहीं था तो दादाजी की बात माननी पड़ी।