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लेकिन थोड़ा जल्दी। यह सुनते ही मैंने उसके पैर फैलाए और उसके हाथ बुर से अलग करते हुए मैं दोनों टांगों के बीच फर्श पर बिछी दरी पर बैठ गया, फिर मैंने उसे थोड़ा आगे अपनी ओर खींचा। जिससे वो करीब आधी लेटी हुई अवस्था में हो गई। फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी बुर में घुसेड़ी, उसकी बुर अभी भी गीली थी तथा थोड़ा थोड़ा रस बह रहा था जोकि उसकी गाण्ड से होता हुआ सोफे पर जा रहा था।

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