थोड़ी देर बाद वो पानी गरम कर के ले आया और उसने
बड़े प्यार से मेरी छूट की खूब सिकाई की. 15-20 मीं की सिकाई के बाद मेरी छुआ का सारा दर्द जाता रहा. उसके बाद वो मेरी बगल में लेट गया. थोड़ी देर बाद उसने तबले पर से लेटर पद और पेन उठा लिया और कुच्छ लिखने लगा. मैने अब जाना की
ये तो पढ़ा लिखा भी है. मैं चुप छाप देखती रही.