वो वैसे
ही सो रही थी. मैने उंगलियो से दोनो होंठो को हल्के से पकड़ा तो
छूट का मूह खुल गया. मुझे रात बातरूम की याद आई जब मैने
उसमे उंगली दल कर सॉफ की थी. मैने उस मूह मे फिर से उंगली दल
दी. तभी भाभी ने अपने पेर सिकोड लिए ओर मेरा हाथ उनके परॉन के
बीच मे डब गया. वो आखें खोल कर मुसकुरी ओर बोली- क्या कर रहे
हो वीनू जी? कल तक तो बहुत शर्मा रहे थे आज उंगीयाँ बहुत चल
रही हैं.