अब धीरे धीरे
मैने उनकी चुचि दबाना सुरू किया. कुच्छ ही देर मे उनकी वो पूरी
चुचि मेरे हाथों मे थी. अफ क्या चुचि थी. ऐसा लगा मैने किसी मखखां के गोले पर या स्पंज के बॉल पर
हाथ रखा हो. मेरी उंगली के दबाव से दबाती तो
थी लेकिन फिर वैसे ही उभर आती थी। मेरे हाथ मे ब्ल्ौसे के
उपर से उनकी ब्रा महसूस हो रही थी पर निपल
कुछ मालूम नहीं पद रहा था.