सानिया यह सब देख बड़े कातिलाना अंदाज में मुस्कुराई, फ़िर चाय लाने चली गई। मैंने अखबार खोल लिया। जब सानिया चाय लेकर आई, तब तक रागिनी भी बाहर आ गई थी और अपने कपड़े जमीन पर से समेट रही थी। सानिया सिर्फ़ एक कप चाय लाई थी, जिसे उसने रागिनी की तरफ़ बढ़ा दिया। रागिनी ने चाय ली और पूछा- अंकल की और तुम्हारी चाय ?
अब जो सानिया ने कहा उसे सुन कर मेरी नसें गर्म हो गई।