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हमारे कमरे की बड़ी खिड़की से तेज हवा आ रही थी और दरवाज़ा काफ़ी हिल रहा था. कुछ देर बाद मैने पुचछा, “इस तरह के वेदर में भी आप क्या सब घरों में जा कर सर्वे करती हैं ?” “जी, जॉब तो जॉब ही है ना. ” “तो आप शादी शुदा हो कर (उसके माथे पर सिंदूर था) भी जॉब कर रही हैं ?” अब वो बी थोड़ी सी खुल सी गयी. बोली, “क्यों, शादी शुदा औरत जॉब नहीं कर सकती ?” “जी यह बात नहीं, घर घर जाना, जाने किस घर में कैसे लोग मिल जाएँ ?” उसने जवाब दिया, “वैसे तो दिन के वक़्त ज़्यादातर हाउसवाइफ ही मिलती है.

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