”
(हालांकि, वही एक सेकन्ड मुझे एक घन्टे के बराबर लग रहा था। )
“हां, फिर भी मुझे नंगा नही होना चाहिए था। कोई जानेगा तो क्या कहेगा कि, मैं अपने बेटे के सामने नन्गी हो गई थी। ”
“कौन जानेगा ?, यहां पर तो कोई था भी नही। तु बेकार में क्यों परेशान हो रही है ?”
“अरे नही, फिर भी कोई जान गया तो। “,
फिर कुछ सोचती हुई बोली,
“अगर कोई नही जानेगा तो, क्या तु मुझे नंगा देखेगा ?”
मैं और मां दोनो एक दुसरे के आमने-सामने, एक सुखी चादर पर, सुम-सान जगह पर, पेड के नीचे एक-दुसरे की ओर मुंह कर के लेटे हुए थे।