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“अरे, तुमने पकड रखा है ना, इसलिये खडा हो गया है मेरा। क्या करुं मैं ?, हाये छोड दो ना। ”

मैं किसी भी तरह से, मां का हाथ अपने लंड पर से हटा देना चाहता था। मुझे ऐसा लग रहा था कि, मां के कोमल हाथों का स्पर्श पा के कहीं मेरा पानी निकल ना जाये। फिर मां ने केवल पकडा तो हुआ नही था। वो धीरे-धीरे मेरे लंड को सहला भी, और बार-बार अपने अंगुठे से मेरे चिकने सुपाडे को छु भी रही थी।

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