अब तो बरदाश्त भी नही होता होगा, कैसे करता है,,,?”
“क्या मां,,,,?”
“वही बरदाश्त, और क्या ? तुझे तो अब छेद (होल) चाहिये। समझा, छेद मतलब ?”
“नही मां, नही समझा,,”
“क्या उल्लु लडका है रे, तु ? छेद मतलब नही समझता,,,,?!!”
मैने नाटक करते हुए कहा,
“नही मां, नही समझता। ”
इस पर मां हल्के-हल्के मुस्कुराने लगी और बोली,
“चल समझ जायेगा, अभी तो ये बता कि कभी इसको (लंड की तरफ इशारा करते हुए) मसल-मसल के माल गीराया है ?”
“माल मतलब,,,!? क्या होता है, मां,,,?”
“अरे उल्लु, कभी इसमे से पानी गीराया है, या नही ?”
“हाय, वो तो मैं हर-रोज गीराता हुं।