उसकी गोरी पिन्डलियों और घुटनो का नजारा करते हुए, मैं भी खाना खाने लगा। लंड की तो ये हालत थी अभी की, मां को देख लेने भर से उसमे सुरसुरी होने लगती थी। यहां मां मस्ती में दोनो पैर फैला कर घुटनो से थोडा उपर तक साडी उठा कर, दिखा रही थी। मैने मां से कहा
“एक रोटी और दे। ”
“नही, अब और नही। फिर रात में भी खाना तो खाना है, ना।