अच्छी सब्जी बना देती हुं, अभी हल्का खा ले। ”
“क्या मां, तुम तो पुरा खाने भी नही देती। अभी खा लुन्गा तो, क्या हो जायेगा ?”
“जब, जिस चीज का टाईम हो, तभी वो करना चाहिए। अभी तु हल्क-फुल्का खा ले, रात में पुरा खाना। ”
मैं इस पर बडबडाते हुए बोला,
“सुबह से तो खाली हल्का-फुल्का ही खाये जा रहा हुं। पुरा खाना तो पता नही, कब खाने को मिलेगा ?”
ये बात बोलते हुए मेरी नजरें, उसकी दोनो जांघो के बीच में गडी हुई थी।