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. . गालियाँ तो चुदाई में ही भली लगती है. . . अब अगली चुदाई में प्यारी-प्यारी गालियां देंगे !”
‘सॉरी, भाभी. . . हां मैं यह पूछ रहा था कि जब आप को मेरे बारे में पता था तब आपने पहल क्यों नहीं की?”
“पता तो तुझे भी था. . . मैं इशारे करती तो तू समझता ही नहीं था. . . फिर जब मुझे पक्का पता चल गया कि तेरे मन में मुझे चोदने की है और तू मेरे नाम की मुठ मारता है तो फिर मेरे से रहा नहीं गया और तुझ पर चढ़ बैठी और मस्ती से चुदवा लिया।

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