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. . कुछ नमकीन-कसैला सा स्वाद था . . . अब वो कुछ अंड-बंड बकने लगी और अपने चूतड़ को आगे-पीछे करने लगी . . . मैंने अपने जीभ के आगे का हिस्सा नुकीला करके उसके योनिद्वार में घुसा दिया . . . उसकी सिसकारियाँ रुकने का नाम नहीं ले रही थीं . . . मैंने जीभ को मटर के दाने जितनी घुंडी पर गोल-गोल घुमाना शुरु कर दिया .

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