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मैं तो खैर लुन्गी पहन कर नदी के अंदर कमर तक पानी में नहाता था, मगर मां नदी के किनारे ही बैठ कर नहाती थी। नहाने के लिये मां सबसे पहले अपनी साडी उतारती थी फिर अपने पेटिकोट के नाडे को खोल कर, पेटिकोट उपर को सरका कर अपने दांत से पकड लेती थी। इस तरीके से उसकी पीठ तो दिखती थी मगर आगे से ब्लाउस पुरा ढक जाता था।

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