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मेरी उत्तेजना चरमसीमा पर थी। तभी मैं चीख पड़ी और मेरा रज छूट गया। तभी भूरा ने अपना लण्ड निकाला और और मेरे मुख में पूरा घुसेड़ दिया। तभी उसका वीर्य मेरे मुख में निकल पड़ा और हलक में उतरता चला गया। मेरा रज निकलता जा रहा था और मैं पस्त हो कर अंधेरे में खोती जा रही थी। सवेरे जब आँख खुली तो मेरा कुर्ता ऊपर था और दादी मां मुस्करा कर मुझे चादर ओढ़ा रही थी।

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