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. . ज्यादा समय, ज्यादा रुपया. . . ये पांच मिनट का पांच सौ है !” “क्या बात है. . . अब्दुल, तेरे लण्ड को तो मैं प्यार से पियूँगी। ” मैंने रुपये लिये और अंधेरे कमरे में घुस गई, अब्दुल ने बाहर से दरवाजा बन्द कर दिया। अन्दर जमीन पर ही एक मोटा बिस्तर डाल रखा था। पहले तो घुप अंधेरे में मुझे कुछ नहीं दिखा फिर धीरे धीरे दो साये नजर आये।

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