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पुरानी यादें पुरानी बातें, इस घर मे बिताये हुए लम्हे उसकी आँख मे फिर आँसू ले आये. उसने बहुत कोशिश की लेकिन फिर चन्द कत्रे आँखों से बैह ही गये. अपने जज़बातों को सम्भाल वो वापस अपने कमरे मे आयी और अपनी अल्मारी के लौकर को खोल उसने वो पैसे निकाले जो वो आज तक वो जमा करती आयी थी. “क्या तुम तय्यार हो?” उसने जय को पूछा.

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