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इन जज़बाती बातों के बीच राज की उत्तेजना बैह् गयी थी और लन्ड एक बार फिर मुर्झा कर ढीला पड गया था, “नही. ” उसने धीरे से काहा. “मुझे छुओ. . . . . मुझे भींचो. . . . मुझे मसलो. . . . ” उसने राज से काहा, “और जब तुम्हारा लन्ड तन जाये तो मुझे प्यार करो. . . . . . . हमारी आने वाली ज़िंदगी के लिये हम जश्न मनायेंगे.

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