गोरी-गोरी चुंची और उस पर की नीली-नीली रेखायें, सब नुमाया हो रहा था । मेरी नजर तो वहीं पर जा के ठहर गई थी। मां ने मुझे देखा, हम दोनो की नजरें आपस में मिली, और मैने झेंप कर अपनी नजर नीचे कर ली और ईस्त्री करने लगा। इस पर मां ने हसते हुए कहा,
“चोरी-चोरी देखने की आदत गई नही। दिन में इतना सब-कुछ हो गया, अब भी,,,,,,,,,,,???”
मां की बाकी बाते तो मेरा उत्साह बढा रही थी, पर उसके मुंह से अपने लिये गाली सुनने की आदत तो मुझे थी नही।