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“सच मौसी, मान जायेगा वो. . . आप कितनी अच्छी हैं. . . !” कविता ने अपनी चूची को उनकी बांह पर पूरा दबाते हुये उन्हें चूम लिया। “लगता है तेरा मन भटक रहा है. . . अब तेरी शादी करा देनी चाहिये !” मौसी ने मन की बात पढ़ ली थी। “मौसी, शादी तो करा देना. . . पर मन को तो हल्का कर दो. . . !” कविता की आवाज में कसक थी।

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